Sunday, 22 May 2016

एक सामान्य वर्ग के नागरिक की आत्मकथा ।


एक सामान्य वर्ग के नागरिक की आत्मकथा ।





हाँ मैं ब्राह्मण हूँ और यही मेरा पाप है जो मुझे मेरे ही देश में अपनों से लड़ने के लिए उकसा रहा है । हाँ मैं अब नफ़रत करता हूँ नीची जाती के लोगो से । पहले से मैं ऐसा नहीं था मेरे कई मित्र नीची जाती से थे और हैं भी , पर अब पहले जैसी आत्मीयता नहीं रही जब मैं ये देखता हूँ की आरक्षण की सीढी पर चढ़कर कैसे मुह चिढाते हैं और सहानुभूति का बहाना करके जले पर नमक लगाते हैं की जैसे वो कह रहे हो की तुमने जो ब्राह्मण के घर पर पैदा होके पाप किया है उसकी सजा तो तुम्हें मिलेगी ही ।
जिन मित्रों के साथ मैं घंटो बैठने में कोई परेशानी नहीं होती थी आज उन्हें देखते ही मन खिन्न हो जाता है । कहते हैं सभी जाती के लोग बराबर है पर मैं कैसे मान लूं ........
मुझे गैर सरकारी संस्थान में पढ़ना पड़ा जबकि मुझसे कहीं कम योग्यता रखने वाले मेरे साथी कहीं अच्छे संस्थानों में गए यहीं से सुरु हुई आरक्षण से लड़ाई और ये लड़ाई आगे चलकर नफ़रत में बदली । मेरे देश में हर जगह आरक्षण है बस में आरक्षण , पढ़ने में आरक्षण , नौकरी में आरक्षण , प्रमोशन में आरक्षण हर तरफ जहाँ आप की नज़र पड़े वही आरक्षण । अब तो साँस लेना भी मुश्किल होने लगा है
बचपन से आरक्षण की गुलामी सहते आया हूँ और अब मैं डरने लगा हूँ की कहीं ये नफरत मुझे मेरे ही लोगो की जान की दुश्मन न बना दे ।
कुछ लोग कहते हैं की हमारे पुर्वजो ने बड़े जुल्म किये है हो सकता है आप लोग सच कह रहे हो पर ये कहाँ का न्याय है की बाप अगर मर्डर करे तो फांसी बेटे को दे दी जाए ।
आरक्षण उन्ही को मिलता है जो नीची जाती के है यानी हम आप उनके मन में ये भर रहे हैं की वे नीच हैं दलित है सताए हुए हैं बेचारे हैं और हम आप ये कहते हैं की हम आरक्षण दे के उनकी मदद कर रहे है लानत है हमारी सोच पर ...........
मैं आरक्षण का बिरोध करता रहा हूँ और आगे भी करता रहूँगा इसलिए नहीं की मैं ब्राह्मण हूँ बल्कि इसलिए की योग्यताओं को प्रोत्साहन मिलाना चाहिए....
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Saturday, 21 May 2016

क्यों रहते है अरविन्द केजरीवाल विरोधियो के निशाने पर ?

क्यों रहते है अरविन्द केजरीवाल विरोधियो के निशाने पर ?


अरविन्द केजरीवाल एक ऐसा राजनेता जिसने कुछ ही समय में ना पुरे देश पर बल्कि पूरी दुनिया पर अपनी छाप छोड़ दी। ये तो आप जानते ही हो की आप ने दिल्ली में रिकॉर्ड 70 में से 67 सीट जीती थी। एक बिलकुल नई पार्टी जिसको दिल्ली की जनता ठीक से जानती भी नही थी वो पार्टी ने ये कारनामा कर दिखाया  बीजेपी कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टी का वो हाल हुवा जो सायद ही भारतीय इतिहास में कभी इतनी बड़ी पार्टी का हुवा हो इस सब का जिम्मेदार अगर कोइ था तो वो  अरविन्द केजरीवाल था।

क्यों है अरविन्द केजरीवाल विरोधियो के निशाने पर।

सायद अरविंद केजरीवाल सत्ता परिवर्तन की बात करते है, गरीबो के हक में बोलते है, भ्रस्टाचार को बर्दास्त नही करते,  इसी लिए वो विरोधियो के निशाने में रहते है। विरोधियो से हमारा मतलब सारी राजनीतिक पार्टियों से नही है ऐसे बहुत से विरोधी नेता है जो अरविन्द केजरीवाल का समर्थन करते है ऐसा नही है की बीजेपी और कांग्रेस में इमानदार नेता नही है इन पार्टियों में भी इमानदार नेता है लेकिन उनके पास पॉवर ही नही है कोई एक्सन लेने की।
दिल्ली में जब आम आदमी पार्टी की सरकार आई थी तो भ्रटाचार में काफी गिरावट आ गयी थी  दिल्ली पुलिस ने रिश्वत लेनी बंद कर दी थी और अब तो आलम ये है की दिल्ली के कई पुलिस स्टेशन में कैमरा तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अन्दर ले जाना मना है दिल्ली पुलिस कहती है की ये सुरक्षा के लिए है लेकिन ये सब जानते है की ये कदम दिल्ली पुलिस ने क्यों उठाया।
आज देश का प्रत्येक वो नागरिक जो इस गन्दी राजनीति से दुखी हो गया है प्रत्येक वो नागरिक जो अब भ्रस्टाचार बर्दास्त नही कर सकता वो आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर रहा है कुछ तो बात है अरविन्द में जो वो देश के लोगो को अपनी ओर आकर्षित कर रहे है।
दिल्ली में जो भी योजनाये चलायी जा रही है वो इतनी काबले तारीफ है की विरोधी नेटा भी उन योजनाओ की तारीफ करने से अपने आप को नहो रोक पा रहे पडोसी राज्य भी इन योजनाओ को अपने राज्य में अपनाने की सोच रहे है।

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जानिए जातिगत आरक्षण को विस्तार से।


जानिए जातिगत आरक्षण को विस्तार से।


अगर घोडा गधे से तेज दौड़ सकता है तो क्या घोड़े के पैर में आरक्षण की जंजीर बांध दे जिससे गधा आगे निकल जाय और घोडा हार जाए। तेज चलना घोड़े की प्रतिभा है कमजोरी नही।
अगर 40% नम्बर पाने वाला पुलिस अधिकारी बन जाता है 80% नम्बर पाने वाला रोजगार ना मिलने के कारण चोर बन जाता है, तब आप सोचये क्या वो S.P साहब उस चोर को पकड़ पाएंगे जो उनसे ज्यादा दिमाक रखता है।
अगर जातिगत आरक्षण जरूरी था तो इसे भारतीय सेना में क्यों नही लागू किया गया अगर जातिगत आरक्षण से सेना के कमजोर होने का डर था तो पूरे देश के कमजोर होने का डर क्यों नही ?
हमारे सविंधान ने ऐसी प्रजातांत्रिक सिविल सोसायटी की नीवं रखी है जिस का अनुसरण कर हम समानता, स्वतंत्रता और भत्रत्ववाद के जरिए त्रण मूलक सामाजिक - आर्थिक लोकतंत्र स्थापित कर सकते है। आरम्भ में हमारे संविधान ने दलित को समानता प्रदान करने के लिए आरक्षण का केवल दश वर्षो तक ही अस्थायी प्रावधान किया था। जिसमे जितनी जल्दी हो सके हम समतावादी सिविल सोसायटी की स्थापना कर सकें, लेकिन ऐसा अब तक सम्भव नही हो सका है। इसके निम्न कारण है-
1- पहला कारण है की आरक्षण को पूरी ईमानदारी से लागू नही किया गया।
2- दूसरा कारण है की इसको राजनीतिक आधार पर और जटिल बनाने की कोसिस की गयी।
3- आरक्षण प्राप्त दलितों को कभी भी प्रशासनिक व् राजनीतिक जिम्मेदारी नही दी गई जिससे वह खुद इसका समाधान निकाल सकें।
4- आरक्षण प्राप्त नागरिको तथा जातियों का कभी भी निष्पक्ष मूल्यांकन नही किया गया। इसका परिणाम है की आरक्षण प्राप्त नागरिक बार बार आरक्षण प्राप्त करते रहते है और दूसरा निचला दलित सही मायने में आरक्षण प्राप्त कर ही नही पाता।
यह एक वास्तविक समस्या है और अब आरक्षण का भी राजनीतिकरण कर दिया गया है। जिससे आरक्षण का स्तर दिन प्रतिदिन SC,ST से बढकर महिला और OBC तक विस्त्रत होता जा रहा है और अब तो आरक्षण के अन्दर भी आरक्षण की बात चल पड़ी है। जैसे राजस्थान की गुर्जर जाति पहले राज्य की आरक्षण व्यवस्था के अंतर्गत OBC में आरक्षण प्राप्त कर रही थी। लेकिन यकायक वह यह मांग करने लगी की उसकी आरक्षण श्रेणी OBC से रद्द कर मीना जाति के तुल्य अनुसूचित जाति में कर दिया जाय। क्युकी OBC आरक्षण कोटा से उन्हें अन्य जाति के सामान अवसर नही मिल पा रहे है। आरक्षण की जाति ने एक बार फिर हवा पकड़ ली है जैसा की गुजरात और हरियाणा जैसे राज्यों में देखा जा सकता है अब तो हर मजबूत वर्ग को आरक्षण चाहिए।
यह हमारे देश के लिए अजीब विडम्बना है की आरक्षण समाप्त या कम होने को तो रहा, बल्कि और बड रहा है। गुर्जर, पटेल और जाट जाति का आन्दोलन दरअसल दलित राजनीति को एक मुद्दा देता है। लेकिन यह हमारे राजनीतिक नेताओ और नीति निर्माताओ की भी असफलता भी दर्शाता है वह स्वतन्त्रता के इतने वर्षो के पस्चात भी दलित कोटा सिस्टम पूरा नही भर पाए है। जो दलित आरक्षण का लाभ उठा कर सम्पनं हो चुके है उनका आरक्षण खत्म कर देना चाहिए और आरक्षण जातिगत नही होना चाहिए क्युकी कही ना कही इससे समाज पर असर पड रहा है क्युकी गरीबी जाति देख कर नही आती सामान्य वर्ग के लोग भी पिछड़े हो सकते है और उनको भी प्रोत्साहित करने की जरुरत है। सरकारी नौकरियों तथा अन्य जगह पर आरक्षण के आधार पर चयन नही करना चाहिए बल्कि समाज के पिछड़े वर्ग को शिक्षित करना चाहिए तथा उनकी शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। सरकारी संस्थानों में आरक्षण के द्वारा चयन करने से वो लोग वंचीत रह जाते है जिनमे सच में क़ाबलियत होती है। देश की राजनीति तो सायद ही कभी चाहे की ये जातिगत आरक्षण खत्म किया जाय लेकिन देश के युवाओ को इस गंदे सिस्टम के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए फिर वो युवा किसी भी जाति का क्यों ना हो।

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क्या दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल सकता है ?


क्या दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल सकता है ?


दिल्ली MCD चुनावों के नतीजे आते ही दिल्ली के मुख्यमत्री अरविन्द केजरीवाल जी ने दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने की मांग की है, आपको याद होगा आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 वादे किये थे जिनमे दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने का भी वादा शामिल था। अब तक बीजेपी और कांग्रेस भी चुनावों में दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने की बात कर चुके है लेकिन अब तक कोइ भी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नही दिला पाया।

क्या दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाया जा सकता है ?

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना असम्भव तो नही है लेकिन भारतीय संविधान को देखते हुवे असम्भव के बराबर ही लगता है। दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने की बात पहली बार नही हो रही पहले भी ये मुद्दा कई बार उठ चूका है पहले भी इस मुद्दे पर कई बार जाँच कमेटिया बैठाई गई लेकिन अंत में जाँच कमेटियो ने भी इस बात को माना की दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नही दिया जा सकता, क्युकी दिल्ली को अभी केंद्र सरकार ही चला रही है। अगर भविष्य में कभी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाता है तो दिल्ली की पूरी सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की होगी अगर कभी दिल्ली में आतंकवाद का हमला हो जाता है तो दिल्ली को सेना नही दी जाएगी उसको दिल्ली पुलिस से ही काम चलाना होगा।
संसद भवन, प्रधानमंत्री आवास, अम्बैशी और  सारे मंत्रालय दिल्ली में ही है, तथा विदेशी मेहमान भी दिल्ली में ही आते है जिनकी सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है।
दिल्ली देश की राजधानी है और राजधानी पर केंद्र का भी अधिकार होता है तो इसको पूर्ण राज्य कैसे बनाया जा सकता है।
अगर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल भी जाता है तो दिल्ली सबसे महंगा सहर हो जायेगा क्युकी फिर दिल्ली सरकार को अपना 90% बजट खुद ही इकट्टा करना होगा तथा केंद्र से दिल्ली को केवल 10% ही बजट मिलेगा जैसा की और राज्यों में होता है। अभी दिल्ली का बजट लगभग 37 हज़ार करोड़ रूपये है, अगर ऐसा होता है तो दिल्ली को खुद ही अपना बजट इकट्टा करना होगा जो की 20 से 25 हज़ार करोड़ ही इकट्टा किया जा सकता है जिससे की दिल्ली की आपूर्ति नही होगी और दिल्ली सरकार  को मजबूरन दिल्ली की जनता पर टेक्स बढ़ाने होंगे।

अगर दिल्ली पूर्ण राज्य बनती है तो दिल्ली सरकार के कर्मचारियों को नहो मिलेगा महंगाई बत्ता 

जैसा की अभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों को और दिल्ली सरकार के कर्मचारियों को महंगाई भत्ता मिलता है अगर दिल्ली पूर्ण राज्य बन गया तो ये भत्ता मिलना भी बंद हो जायेगा जैसा की और राज्यों में नही मिलता।

क्यों चाहते है केजरीवाल दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाना।

केजरीवाल जी के वादो पर नजर डालें तो उन्होंने अपने वादों में दिल्ली में नये स्कूल, कोलेज और हॉस्पिटल खोलने का वादा किया था लेकिन ये सब करने के लिए दिल्ली को जमीन की जरुरत पड़ेगी जो की केंद्र के पास है।
2012 निर्भया केस के बाद उठा पूर्ण राज्य का मुद्दा दिल्ली सरकार के पास पुलिस का ना होने से उठा था तो केजरीवाल चाहते है की दिल्ली की पुलिस पर उनका अधिकार हो जिससे की वो दिल्ली वालो को सुरक्षा दे सकें। केजरीवाल जी चाहते है की DRDO को भी संसोधित किया जाय और इसके अधिकारों को बदला जाय। दिल्ली के राज्यपाल के भी अधिकार सिमित कर दिए जाय। दिल्ली की कानून व्यवस्था को बदलने का पूर्ण अधिकार दिल्ली सरकार के पास हो।
वैसे इन सब बातो के देखते हुवे दिल्ली का पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना थोडा मुस्किल नजर आता है, अगर बीजेपी कांग्रेस इस मुद्दे पर साथ देते है तो भी इस बिल को संसद में पास करना आसान नही होगा क्युकी इस बिल को संसद में पास करवाने के लिए एक तिहाई बहुमत की जरुरत पड़ेगी अगर बीजेपी कांग्रेस मान भी जाती है तो बाकी की पार्टी मानेंगी या नही ये देखने वाली बात होगी।
अब ये मुद्दा कहा जाकर खत्म होता है ये देखना बड़ा दिलचस्प होगा।
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Thursday, 19 May 2016

आइये जानते है भ्रष्टाचारी नेता कैसे आ जाते है दुबारा सत्ता में।


आइये जानते है भ्रष्टाचारी नेता कैसे आ जाते है दुबारा सत्ता में।


भ्रष्टाचार नाम सुनते ही सायद आपका भी खून खौलता होगा आखिर खौले भी क्यों ना हम अपने खून पसीने की कमाई से देश निर्माण के लिए टेक्स देते है और अगर उस टेक्स को कोई भ्रष्ट नेता अपनी बाप की सम्पत्ति समझ कर अपने पास रख ले तो खून तो खौलता है। दोस्तों हमारा देश की जनता भी महान है, सब कुछ पता होने के बावजूद भी भ्रष्ट नेताओ को दुबारा सत्ता में ले आती है, हमारे देश में 10% जनता ऐसी है जो अपना वोट अपने बच्चो का भविष्य सर्फ कुछ पैसो के लालच में बेक देती है, 10% जनता ऐसी है जो शराब और बाकि की नशीली चीजो के लिए अपना ईमान बेक देती है, 10% जनता को पता ही नही होता की उनको किसको वोट देना है उनको जिस पार्टी को वोट देने को बोला जाता है वो उसी पार्टी को वोट दे देते है, 30% जनता आज भी जाति के आधार पर वोट देती है चाहे उनका उम्मीदवार भ्रष्ट या बलात्कारी ही क्यों ना हो, सबसे बड़ी दुःख की बात तो ये है की देश की 40% पढ़ी लिखी जनता वोट देने ही नही जाती वो पढ़े लिखे होने के बावजूद अपने वोट की किमत को नही समझते लेकिन बाद में सत्ता धारी पार्टी को खूब गालिया देते है, सही मायने में देखा जाय तो देश को यही लोग बर्बाद कर रहे है। दोस्तों सबसे पहले हमको अपने वोट की ताकत समझने की जरुरत है सोचये हमारे वोट में इतनी ताकत है की बड़े से बडा नेता भी हमारे सामने हाथ जोड़ कर खड़ा रहता है। तो दोस्तों आज से हम कसम खाते है की जाति के आधार पर, और चंद पैसो के लिए अपना वोट किसी भ्रष्ट पार्टी को नही देंगे, और सबसे बड़ी बात चाहे कुछ भी हो जाय वोट जरुर देंगे।
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Wednesday, 18 May 2016

पंजाब चुनावी धमासान 2017


पंजाब चुनावी धमासान 2017

दिल्ली सच में दिल वालो की है कब किसको उठा दे और कब किसको गिरा दे ये कहना मुश्किल है दिल्ली को बदलाव चाहिए था इसलिए उसने दिल्ली में आम आदमी पार्टी को मौका दिया और आम आदमी पार्टी की रिकॉर्ड 70 में से 67 सीट आई अब आम आदमी पार्टी दिल्ली वालो की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है ये देखने वाली बात है, अब बात करते है पंजाब की क्या आम आदमी पार्टी पंजाब में भी अपना जादू चला पायेगी। आपको याद होगा लोकसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को सिर्फ पंजाब से ही 4 सीट मिली थी जिसकी वजह से आप का विश्वास सातवे आसमान पर है उनको पूरा विश्वास है की पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 में भी उनको जरुर कामयाबी मिलेगी, लेकिन आप को ये भी नही भूलना चाहिए की लोकसभा चुनावों में दिल्ली में सभी 7 सीट बीजेपी को मिली थी लेकिन लगभग एक साल बाद ही दिल्ली की जनता ने बीजेपी को नकार दिया था ऐसा ही कुछ पंजाब में भी हो सकता है। वैसे अभी के हालातो को देखा जाय तो आप का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है। ये तो सच है की पंजाब बादल सरकार से उब चुकी है और अब पंजाब की जनता को भी बदलाव चाहिए तो ये देखना दिलचस्प होगा की पंजाब किसपर अपना भरोसा दिखाती है। बीजेपी की बात की जाय तो बीजेपी की लगातार कई राज्यों में मिली पराजय के बाद उनको पंजाब में काफी मेहनत करने की जरुरत होगी और अभी तक कांग्रेस तो इस दौड़ में कही नजर ही नही आ रही। तो पंजाब के युवा किसको मौका देंगे क्या पंजाब की जनता किसी नयी पार्टी को मौका देगी या फिर जो चल रहा है वही चलता रहेगा ये देखने वाली बात है।
धन्यवाद
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जाति गत आरक्षण और राजनीती।


जाति गत आरक्षण और राजनीती।


आपको ये जानकर आश्चर्य होगा की भारत इकलोता ऐसा देश है जहा पर जातिगत आरक्षण दिया जाता है। दोस्तों अगर आप भी आरक्षण का लाभ उठा रहे है तो एक सवाल आज अपने आप से पूछो की क्या सच में मेरे को आरक्षण की जरुरत है ? आपके आस पास ऐसे बहुत से लोग आपको मिल जायेंगे जिनको दो वक्त की रोटी भी नशिव नही होती और वो सामान्य वर्ग से होते है लेकिन उसको सरकार कोइ आरक्षण नही देती क्युकी वो सामान्य वर्ग से है, देश की प्रत्येक राजनीतीक पार्टी आरक्षण को बढावा देती है जो की गलत है, में ये नही कहता की आरक्षण खत्म होना चाहिए आरक्षण बहुत जरुरी है ये होना चाहिए लेकिन आरक्षण जाती के आधार पर नही होना चाहिए क्युकी गरीबी जाति पूछ कर नही आती किसी भी वर्ग का इन्सान गरीब हो सकता है। SC, ST, OBC में ऐसे बहुत से लोग है जो करोड़ पति है लेकिन वो भी आरक्षण का उतना ही फायदा उठा रहे है जितना की इन्ही वर्ग का गरीब उठा रहा है । स्कूलो और कॉलेजो में सरकार के द्वारा जो पैसे आता है SC, ST और OBC के लिए वो पैसा इन वर्ग के सभी विद्यार्थियों को मिलता है चाहे उसका परिवार करोड़ पति ही क्यों ना हो उसी स्कूल में ऐसे भी कई विद्यार्थी होते है जो सामान्य वर्ग से होते है और उनके पास किताबे लेने के लिए भी पैसे नही होते जिनका परिवार दो वक्त की रोटी भी बड़ी मुस्किल से खा रहा है लेकिन जो आरक्षण ऐसे समाज को मिलना चाहिए वो नहो मिलता और ऐसा समाज हमारी राजनीती की भेंट चढ़ जाता है। जातिगत आरक्षण ख़त्म होना चाहिए, अमीर और अमीर हो रहा है और गरीब और गरीब हो रहा है इसकी वजह काफी हद तक ये जातिगत आरक्षण भी है।
धन्यवाद
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